आयुर्वेदानुसार भोजन के प्रकार

आयुर्वेदानुसार भोजन के प्रकार

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

आयुर्वेद जीवन का समर्थन करने वाले और जीवन को नुकसान पहुंचाने वाले खाद्य पदार्थों के बीच अंतर करता है। कुछ भोजन शरीर और मन का उत्तम ढंग से पोषण करते हैं, जबकि अन्य नहीं करते हैं।

सात्विक भोजन

सात्विक गुणवत्ता वाले भोजन शरीर का निर्माण करते हैं और सभी प्रकार के लोगों के लिए स्पष्टता, खुशी और प्राण ऊर्जा प्रदान करते हैं। घी, शहद, दूघ, ताजे, पके हुए फल और सब्जियां, साथ ही साथ अनाज और चावल सात्विक खाद्य पदार्थों के उदाहरण हैं। भूमि के ऊपर उगने वाली सब्जियां भूमिगत उगने वाली सब्जियों से बेहतर होती हैं, क्योंकि वे अधिक सौर ऊर्जा संचित कर सकती हैं। चुकुंदर और गाजर अपवाद हैं। केवल रासायनिक और आनुवांशिक संशोधन रहित, 00% शुद्ध भोजन, सात्विक हो सकता है। स्वादिष्ट, हल्के और ताजे वैदिक मेन्यू स्वभाविक रुप से सात्विक होते हैं।

राजसी भोजन

राजसी गुणवत्ता वाला भोजन तन और मन को गर्मी प्रदान करता है। अत्यधिक या गलत मात्रा में इस्तेमाल करने पर, वे व्यक्ति को हठी, आक्रामक और अघीर बना सकता है। हालांकि, जो आलसी, सुस्त और निष्क्रिय हैं वे राजसी भोजन को अल्प मात्राओं में खा सकते हैं। राजसी भोजन कफ सरंचना वाले लोगों को तरोताजा कर देता है और उन्हें किसी भी गतिविधि और चीजों को देखने की क्षमता के लिए ज्यादा दृढ़ संकल्प और आवेग प्रदान करता है। सभी गर्म मसाले, मूली, प्याज, लहसुन, लीक, पेपरिका और चिली राजसी भोजन के उदाहरण हैं। इसके अलावा काफी, ब्लैक टी, शराब और विलासी भोजन इस श्रेणी से संबंधित है और यदि खाये जाते हैं तो, बहुत ध्यान दिया जाना चाहिए।

तामसी भोजन

तमस गुणवत्ता वाला भोजन तन और मन को शिथिल, सुस्त और नीरस बनाता है। वे पाचन प्रणाली पर बोझ डालते हैं और बीमारी को बढ़ावा देते हैं। वे भोजन विशिष्ट विषाक्त पदार्थों को उत्पादित करते हैं। इसका शाब्दिक मतलब होता है “अपच भोजन”। तामसी भोजनों में मांस, अंडे, सख्त चीज, पैकबंद दूध, प्रिजर्वेटिव्स युक्त भोजन, डीप फ्रोजन और कैन बंद उत्पाद, दोबारा गर्म किया गया भोजन, इंस्टेन्ट भोजन, आनुवांशिक तौर पर संसोधित और सिंथेटिक भोजन शामिल है। सिरका, कैमिकल की दृष्टि से अत्यधिक अम्लता वाला एल्कोहॉल माना जाता है, परिष्कृत शक्कर, चॉकलेट, औद्योगिक तौर पर निर्मित नमक और मूंगफली के सभी उत्पादों में ऐसे तत्व होते हैं जिनका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। मशरुम और तोफू चीज भी तामसी भोजन के समूह से संबंधित है। पुराना भोजन, फरमेंन्टेड पेय (एल्कोहॉलिक ड्रिंक्स), यीस्ट वाला भोजन या मशरुम तामसी होते हैं। हर तरह का ड्रग तमस से पूर्ण होता है। इसीलिए, व्यक्ति को इस तरह के भोजन और पेय पदार्थों पर नजर रखनी चाहिए।

यह भी पढ़ें : भोजन ही जीवन है

सफेद शक्कर

सफेद परिष्कृत शक्कर से लगभग सभी वियामिन और मिनरल निकाल लिए जाते हैं। यह शरीर में रासायनिक बम जैसा काम करती है, क्योंकि यह शरीर की कोशिकाओं में मुक्त कणों को बांध देती है और उनका पोषण करती हैं। गन्ने की कच्ची शक्कर, पॉम शुगर, गुड़ और शहद की नपी-तुली मात्रा लें। डायबिटीज वाले लोग भी फ्रूक्‍्टोज इस्तेमाल कर सकते हैं। शर्करा जो गन्ने की परिष्कृत शक्कर होती है, एकमात्र एक ऐसी शक्कर है जिसमें प्राकृतिक छान वैल्यू और संतुलित पित्त होता है। शक्कर के विकल्प इसकी जगह नहीं ले सकते हैं, क्योंकि साबित हो चुका है कि वे मुक्त कणों को बढ़ाते हैं। पाचन तंत्र उन्हें बाहरी तत्व मानता है।

ध्यान रखें: शहद को 40 डिग्री से अधिक तापमान पर न उबालें क्योंकि इसके कारण विषाक्त पदार्थ उत्पन्न हो सकते हैं।

पुरानी आयुर्वेदिक कहावत है: यदि आप शहद को गर्म करते हैं, अमृत विष में तब्दील हो जाता है!

Leave a Reply