माहवारी (मासिक-धर्म) सम्बंधी परेशानियां

लड़कियां जब यौवनास्था में प्रवेश करने लगती हैं तो पहली बार मासिक-धर्म या माहवारी प्रारम्भ होती है। यह योनिमार्ग से महीने में 1 बार एक निश्चित अवधि में हुआ करती है जो प्राय: 3-4 दिनों तक रहता है। कई स्त्रियों के यह 6 से 7 दिन तक रहकर बंद हो जाता है।

मासिक धर्म का समय

सामान्यत: स्त्री को प्रथम मासिक-धर्म के बाद दूसरा मासिक-धर्म 27 दिन तो किसी को 28 दिन में होता है। ऋतुचक्र के अनुसार माहवारी का नियत समय पर होना जरूरी रहता है। इस क्रिया से स्त्रियों का गर्भाशय और प्रजनन संस्थान शुद्ध और स्वस्थ होकर गर्भाधान के लिए उपयुक्त क्षेत्र बने रहते हैं और स्त्रियों का स्वास्थ्य भी उत्तम बना रहता है।

जब गर्भाशय, डिम्बकोष या प्रजनन संस्थान किसी भी कारणवश रोगग्रस्त हो जाते हैं। तब ऋतुचक्र बिगड़ जाता है और उन्हें अनेक प्रकार से मानसिक, शारीरिक कष्ट होने लगता है जैसेकि मासिक-धर्म का अनियमित आना, मासिक-धर्म का कष्ट के साथ आना आदि।

अनियमित मासिक धर्म

स्त्रियों को मासिक-धर्म 28 दिन के बाद हुआ करता है लेकिन कई औरतों को यह 24 दिन के बाद हो जाता है तथा कई महिलाओं को यह 32 दिन के बाद हो जाता है। यदि मासिक-धर्म 24 दिन के पहले यह 32 दिन के बाद आये यह अनियमित मासिक-धर्म कहलाता है।

मुख्य कारण

अधिक शारीरिक परिश्रम करना, शरीर में खून की कमी, मैथुन में पूर्ण संतुष्ट न होना, अधिक ठंडी वस्तुओं का सेवन करना, शरीर को ठंड लग जाना, थकावट, शोक, क्रोध, भावुकता, ईर्ष्या और असमय भोजन करना आदि बहुत से ऐसे कारण होते हैं जिसके कारण से या तो माहवारी रुक जाती है। यह माहवारी देर से आती है।

इसी प्रकार कभी-कभी माहवारी ज्यादा भी आती है। गर्भाशय के पलट जाने, दुर्बलता, पीलिया, गठिया का रोग, जरायु (जरायु) में खून का इकट्ठा होना तथा अधिक संभोग के कारण इस रोग की शिकायत हो जाती है।

लक्षण

भूख का न लगना, बार-बार उल्टी की इच्छा होना, जरायु (गर्भाशय) के स्थान में दर्द, स्तनों में दर्द, दिल की धड़कन का तेज होना, सांस लेने में कष्ट, नींद न आने की शिकायत, कमर में दर्द, हर समय थकावट के कारण आलस्य, पेट में दर्द और शरीर में एलर्जी की शिकायत आदि मासिक-धर्म के विकार से सम्बन्धित लक्षण हैं।

भोजन तथा परहेज

माहवारी में सादा तथा शीघ्र पचने वाला भोजन करना चाहिए।
शारीरिक परिश्रम और व्यायाम प्रतिदिन करना चाहिए तथा मानसिक शांति को बनाए रखना चाहिए।
मक्खन निकले हुए दूध का सेवन करना चाहिए। अधिक चिकनी तथा मसालेदार चीजों को नहीं खाना चाहिए। माहवारी में महिलाओं को सूर्य निकलने से पहले स्नान कर लेना चाहिए। माहवारी में स्नान करने से पहले शरीर पर सरसों के तेल की मालिश करनी चाहिए। यदि कब्ज हो तो उसे दूर करना चाहिए।

विभिन्न औषधियों से उपचार-

1. बबूल

100 ग्राम बबूल का गोंद कड़ाही में भूनकर चूर्ण बनाकर रख लें। इसमें से 10 ग्राम की मात्रा में गोंद, मिश्री के साथ मिलाकर सेवन करने से मासिक-धर्म की पीड़ा (दर्द) नष्ट हो जाती है और मासिक-धर्म नियमित रूप से समय से आने लगता है। बबूल का भूना हुआ गोंद 4.5 ग्राम और गेरू 4.5 ग्राम, इनको पीसकर प्रात:काल फंकी लेने से मासिक-धर्म में अधिक खून का आना बंद हो जाता है। बबूल की 20 ग्राम छाल को 400 मिलीलीटर पानी में उबालें, जब यह 100 मिलीलीटर शेष बचे तो इसे उतारकर ठंडा कर लें। बस काढ़ा तैयार हो गया। इस काढ़े को दिन में 3 बार पिलाने से मासिक-धर्म में अधिक खून का बहना बंद हो जाता है।

2. तिल

तिल 5 ग्राम, 8 दाने कालीमिर्च, एक चम्मच पिसी सोंठ, 4 दाने छोटी पीपल। सभी को एक कप पानी में काढ़ा बनाकर पीने मासिक-धर्म सम्बन्धी शिकायतें दूर हो जाती हैं।

3. मेथी

50 ग्राम मेथी के बीज और 40 ग्राम मूली के बीजों को पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर नियमित रूप से 2-2 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मासिक-धर्म सम्बन्धी परेशानियां दूर हो जाती हैं।

4. तुलसी

मासिक-धर्म होने पर यदि कमर में दर्द रहता है, तो 1 चम्मच तुलसी की पत्तियों का रस सुबह के समय सेवन करने से कमर दर्द नष्ट हो जाता है। तुलसी के बीज, पलाश (ढाक) पीपल, असगंध, नागकेसर तथा नीम की सूखी पत्तियां सभी को समान मात्रा में लेकर कूट-पीसकर कपड़े से छान लें। इसमें थोड़ी सी मात्रा में मिश्री मिलाकर 2 चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सुबह गाय के दूध के साथ सेवन करने से मासिक-धर्म नियमित तथा खुलकर आने लगता है।

5. आम

आम की मंजरी 50 ग्राम तथा गुड़ 50 ग्राम, दोनों को 500 मिलीलीटर पानी में डालकर उबालें, जब यह 100 मिलीलीटर की मात्रा में बचा रह जाए तो उसे छानकर पी लें। इससे मासिक-धर्म खुलकर आता है।

6. कपास

डोडा कपास का गूदा 24 ग्राम, अमलतास का गूदा लगभग 30 ग्राम, सौंफ, तुख्म, गाजर, सोया, गुलाबनफ्शा दस-दस ग्राम पुराना गुड़ 30 ग्राम को 1 लीटर पानी में उबालें, जब पानी 250 मिलीलीटर की मात्रा में बचा रह जाए तो इसे छानकर पिलाना चाहिए। इससे माहवारी खुलकर आने लगती है। नोट: इसे गर्भवती स्त्री को नहीं पिलाना चाहिए। इससे गर्भपात हो जाता है। इसके सेवन से मासिक-धर्म का खून रुक-रुककर आना या देर से आना आदि रोग ठीक हो जाते हैं। इसे तीन दिन तक प्रतिदिन पिलाना चाहिए। इससे मासिक-धर्म नियत और निश्चित समय पर होने लगती है।

कपास के 100 ग्राम पत्तों को 500 मिलीलीटर पानी में उबालें। पानी जब 250 मिलीलीटर की मात्रा में बचा रह जाए तो उसे छानकर उसमें थोड़ा सा गुड़ मिलाकर सेवन करें। इससे मासिक-धर्म सम्बन्धी परेशानियां समाप्त हो जाती हैं।

7. करेला

2 चम्मच करेले के रस में चीनी मिलाकर सेवन करने से मासिक-धर्म नियमित रूप से आने लगता है।

8. केला

केले के तने में से छाल (परत) निकालकर उसे कुचलकर उसका 4 चम्मच रस निकाल लें। इसे 7-8 दिनों तक निराहार (बासी मुंह) सेवन करने से किसी भी कारण से रुका हुआ मासिक-धर्म नियमित रूप से आने लगता है।

9. कालीमिर्च 

4-5 कालीमिर्च के बारीक चूर्ण को एक चम्मच शहद में मिलाकर 20-25 दिनों तक सेवन करने से मासिक धर्म की अनियमितता समाप्त हो जाती है।

10. धनिया

लगभग 20 ग्राम धनिया को 200 मिलीलीटर पानी में डालकर उबालें जब 50 मिलीलीटर पानी शेष रह जाए तो छानकर मिश्री मिलाकर रोगिणी को सेवन करा दें। इस प्रयोग से मासिक-धर्म में अधिक रक्त का आना बंद हो जाता है।

लगभग 20-25 ग्राम धनिये के दानों को पानी में उबालें। जब लगभग आधा कप पानी बचा रह जाए, तो इसे छानकर उसमें गुड़ मिलाकर सेवन करने से मासिक-धर्म की परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है।