Home सनातन हिन्दु जीवन की विशेषताएँ

हिन्दु जीवन की विशेषताएँ

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  • प्रतिदिन तीन काम- नित्य स्नान, नित्य ध्यान, नित्य व्यायाम।
  • सप्ताह में एक दिन – सिर से पैर के तलबे तक सारे शरीर को तेल लगाकर गरम पानी से स्नान करना।
  • पक्ष में (15 दिन में) एक बार-व्रत रखना, अर्थात कुछ नहीं खाना।
  • मास में एक दिन – विरेचन (जुलाब) लेना।
  • वर्ष में एक बार प्रवास। किसी प्रेरणा देने वाले स्थान पर सम्पूर्ण परिवार के साथ जाना।
  • सप्ताह में एक दिन परिवार के सभी सदस्यों ने मिलकर एक घंटा सत्संग करना।
  • घर के सामने तुलसी का पौधा हो, ऐसी अच्छी व्यवस्था हो।
  • घर के द्वार या योग्य स्थान में ॐ , शुभ लाभ, जय श्री राम इत्यादि मंगल शब्द लिखें।
  • घर में देवी-देवता, महापुरुषों और पूर्वजों के चित्र योग्य स्थान में सुशोभित करें।
  • घर में धार्मिक ग्रंथ रहें और उनका पठन प्रतिदिन होता रहे।
  • घर में उत्तम दैनिक, साप्ताहिक, मासिक पत्र आते रहें और घरवाले उनको पढ़ते रहें।
  • घर में भजन कीर्तन सत्संग इत्यादि कार्यक्रम होता रहे।
  • घर में एक पूजास्थान रहे। घर का हर सदस्य दिन में कम से कम एक बार वहाँ जाता रहे।
  • घर में आये अतिथियों का योग्य आदर सत्कार होता रहे।
  • संस्कृत भाषा के अध्ययन में घर के सभी की रूचि रहे।
  • पड़ोसियों के साथ मधुर संबंध रहें।
  • बचत का अभ्यास घर में सभी को हो। यह धन के बारे में आदर व्यक्त करने का संकेत है।
  • सोने से पहले ईश स्मरण करने का अभ्यास रहे। दिनभर किए गए कामों के बारे में निर्मल भाव से अवलोकन करने का भी अभ्यास हो।
  • भाषाओं को सीखना चाहिए। ज्यादा भाषाएँ जिसको आती हैं, उसकी व्याप्ति विशाल होती है। पहले बोलना, पश्चात्‌ पढ़ना-लिखना भी सीखना चाहिए।
  • पत्र लिखने का अभ्यास अत्यंत श्रेष्ठ है। गौरव को बढ़ाता है।
  • दान देने की प्रवृत्ति बढ़नी चाहिए।
  • शुभ अवसर पर मंगल स्नान, शुभ्र वस्त्र धारण, मंदिर जाकर देव दर्शन, दान और मिष्ठान बॉटना, ये पाँच काम करने ही चाहिए।
  • दूसरों को खिलाकर खाना ही धर्म है।
  • घर में इन शब्दों का प्रयोग साधारणतः होता रहे। पूजा, अभिषेक, तीर्थ, नैवेद्य, प्रसाद, आरती, प्रदक्षिणा, साष्टांग प्रणाम, अगरबत्ती, धूप,दीप, कर्मफल, पुनर्जन्म, धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, अर्पण, पाप-पुण्य,स्वर्ग-नरक, सुख-दुःख, प्रातः रात, जन्म-मरण, उत्थान-पतन।
  • घर में सब सदस्यों को करने योग्य काम झाड़ू लगाना, बिस्तर बिछाना,उसे समेटकर रखना, कपड़े धोना, कपड़े सुखाना, लोहा करना, रसोई करना, परोसना, थाली रखना, पानी रखना, बर्तन माँजना, भोजन करना, सामान लाकर देना, सब्जी काटना, दुकान जाना, खरीदारी करना, अगरबत्ती जलाना, दीप जलाना, पत्र लिखना, लेखा-जोखा लिखना,रंगोली बनाना, आरती करना, आरती देना, आरती लेना, तीर्थ लेना,प्रसाद स्वीकारना, नमस्कार करना, वाहन साफ करना, स्नानगृह धोना,शौचायलय धोना, जमीन साफ करना, दूरभाष सुनना और नोट करके बताना, कुर्सी-टेबल साफ करना, ध्यान करना, व्यायाम करना, मंद श्वासोच्छुवास करना।
  • अनावश्यक खर्च, भोगवाद (Consumerism) हमारी प्रकृति और अपनी धर्मप्रवृत्ति को शोभा नहीं देता, योग्य भी नहीं है।
  • बन्धुजनों को रिश्ते से पहचानना। उन्हीं शब्दों से उन्हें सम्बोधित करना।
  • मंगल प्रसंगों में धार्मिक पहलू को महत्त्व देकर उस श्रद्धा और एकाग्रता से, शांति से करना। सामाजिक पहलू का भी योग्य रीति से ध्यान रहना।
  • निमंत्रण पत्रों को मातृभाषा या संस्कृत में छपवाना।

ऐसी अनेकों विषताएं है हिन्दू जीवन की।